संदेश

2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आओ रिश्ता संवारें

चित्र
नमस्कार दोस्तों आज घर घर में अजीब सा तनाव का माहौल व्याप्त है।  हँसते भी है तो जैसे बहुद बड़ी मजबुरी हो, वर्ना जैसे हँसना ही भूल गये है। जिंदगी खुशनुमा बनाने की बड़ी कोशिश करते है हम बहुत प्रयत्न भी करते है मगर हम जो चाहते है वो मिल जाये ये जरुरी भी नही।  कितने ही रिश्ते  ग़लतफ़हमी की वजह से टूट जाते है।  कोई हमारी ग़लतफ़हमी दूर भी करना चाहे तो हम उसे अपनी बात कहने का मौका नहीं देना चाहते। शायद हमें लगता है कि हम सही है फिर हम क्यों सामने वाले की सुने कई। बार हमें जो दिखाई देता है वो सच नहीं होता। पर हम किसी के बहकावे में आकर या किसी अज्ञान और जलन के वशीभूत होकर उसे सच मान बैठते है और यही से शुरू हो जाता है गलतफहमी का तांडव। ऐसा तांडव जो हमारी खुशियों को बर्बाद कर देता है। पल पल हमें घुटन का अहसाह करता है ये ग़लतफ़हमी हमारी बूदधि पर एक ऐसा आवरण बना देती है जो हमें सही गलत का फर्क करने की शक्ति छीन लेता है।अचानक हमारे व्यवहार में एक बहुत बड़ा परिवर्तन आने लगता है। जो कभी हमें जान से भी प्यारा था वो हमें हमारा सबसे बड़ा दुश्मन नजर आता है।  ये सब अचानक ही नहीं ...