आओ रिश्ता संवारें

नमस्कार दोस्तों
आज घर घर में अजीब सा तनाव का माहौल व्याप्त है।  हँसते भी है तो जैसे बहुद बड़ी मजबुरी हो, वर्ना जैसे हँसना ही भूल गये है। जिंदगी खुशनुमा बनाने की बड़ी कोशिश करते है हम बहुत प्रयत्न भी करते है मगर हम जो चाहते है वो मिल जाये ये जरुरी भी नही।
 कितने ही रिश्ते  ग़लतफ़हमी की वजह से टूट जाते है।  कोई हमारी ग़लतफ़हमी दूर भी करना चाहे तो हम उसे अपनी बात कहने का मौका नहीं देना चाहते। शायद हमें लगता है कि हम सही है फिर हम क्यों सामने वाले की सुने कई। बार हमें जो दिखाई देता है वो सच नहीं होता। पर हम किसी के बहकावे में आकर या किसी अज्ञान और जलन के वशीभूत होकर उसे सच मान बैठते है और यही से शुरू हो जाता है गलतफहमी का तांडव। ऐसा तांडव जो हमारी खुशियों को बर्बाद कर देता है। पल पल हमें घुटन का अहसाह करता है ये ग़लतफ़हमी हमारी बूदधि पर एक ऐसा आवरण बना देती है जो हमें सही गलत का फर्क करने की शक्ति छीन लेता है।अचानक हमारे व्यवहार में एक बहुत बड़ा परिवर्तन आने लगता है। जो कभी हमें जान से भी प्यारा था वो हमें हमारा सबसे बड़ा दुश्मन नजर आता है।
 ये सब अचानक ही नहीं होता बड़ा लम्बा समय लगता है।  अगर हम अपने रिश्ते के प्रति सजग रहे और बात बनने से पहले ही सबकुछ स्पष्ट कर दे तो परिस्थिति बदल सकती है। अगर हम अपने रिश्ते को अहमियत देते है तो फिर हमें सही वक्त आने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए क्युकी सही काम के लिए हर वक्त सही होता है।  समय रेट संभल लो वरना वो रिश्ता एक नासूर बन जायेगा जो पल पल रिसता ही रहेगा

टिप्पणियाँ

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. Bilkul Sahi Hai. Lekin is duniya main har ek cheej badalti hai, har cheej ke andar badlav jaroor aata hai. Ye prakrati ka niyam hai. Hum apne aap ko bhi dekh lein to jo shakal aaj hamari hai vo pahale kabhi nahi thi or na hi bhavishya main vaisi rahegi, badal jayegi. Wahi baat rishton main bhi hai. Many times hum sach ko dekh rahe hote hain lekin kar kuchh nahi paate hai. But koshish jaroor karni chahiye. Apni taraf se kami ni chhodni chahiye.

      हटाएं
  2. Bilkul sahi baat he Magar jindagi ko aasan or Kathin bnana dono hamare hath me he.ham jitni kisi se ummide rakhenge takleef utni hi hane hi hogi jiska ehasas kebal ham hi kar sakte he or koi nahi kyonki riste bnana to aasan hota he magar nibhana utna hi muskil .

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें